kaash fir ek baar....

I don't know why, but whenever i try to write something,
it end up being a blue thought,
again here is a poem (may be)
with some blue thoughts,
read on...




AnSh :)




काश फिर एक बार
तुम मेरे साथ हो,
तेरे हाथों में मेरा हाथ हो,
तेरी बातों में मेरी बात हो,
हम यूँ ही चलते रहे,
और फिर चलते चलते खो जाए,


काश फिर एक बार,
मेरी साँसों में तेरी सांसें हो,
और खामोश तन्हाई भी पास हो,
तुम बस कहती रहो,
और मैं तुम्हे ख़ामोशी से देखता रहूँ,


काश फिर एक बार,
तुम एकदम से खामोश हो जाओ,
फिर मेरे काँधे पर सर रख के सो जाओ,
और मैं जागता रहूँ तुम्हे देखते हुए,
तुम्हारे प्यार को महसूस करते हुए,


काश फिर एक बार,
तुम रूठो तो मैं मनाऊँ कुछ गुनगुना के,
तुम मुस्कुराओ और फिर गले से लग जाओ,
फिर देखो तुम मेरी आँखों में,
एक अनकहा वादा लो मुझसे,
ना कभी जुदा होने का,


काश फिर एक बार  ,
तुम मेरे साथ हो ,
तेरे हाथों में मेरा हाथ हो,
मगर ऐसा तब हो
जब तुम यहाँ हो...
जब तुम यहाँ हो...
काश तुम यहाँ हो.....

काश ये काश ना होता,
तो आज मैं यूँ तन्हा ना होता....





AnSh.....

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