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this poem belongs to Parag Bhaisaab ,
who sent it me as an comment on this  Photograph,..




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AnSh :)


आसमान पर ये टहल रहा है कौन,
चलते-चलते यूँ संभल रहा है कौन,
नाम है सूरज मेरा अगर,
तो वहां पर ये ढल रहा है कौन,
गोया तन्हाई मेरी साथी है,
फिर मेरे साथ ये चल रहा है कौन,
एक मुद्दत से मैं इन सूचों में हूँ,
लम्हा-लम्हा पिघल रहा है कौन....






AnSh :)

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