कल और आज....!!!

वो हर दरवाजा वो झरोखा बंद है आज ..
जो खुला था तेरी हलकी से आहट पे कभी ..
वो फूल वो डाली... सूखी पड़ी है आज..
जो महकी थी तेरी खुशबू से कभी...
वो आँखे वो होंठ उदास है आज...
जो हंसते थे तेरी हलकी सी हंसी पे कभी..
वो पलकें ....बोझिल है भीगी है आज...
जो झुकती थी तेरी शरारत पे कभी....
वो शाम भी ढलती जा रही है..आज..
जो गुजरी थी तेरी बाहों में कभी......!!!







PS. I am not at all a Broken Heart,
I just like writing these kind of poems (don't know if any of 'em qualifies as poem :D)

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