कुछ कह पाता तो ये काश न रह जाता..........

उनकी उंगलियाँ मेरे पूरे हाथ से बड़ी थी,
उनके जूतों में मेरे दोनों पैर समा जाते थे,
उनके कन्धों को छूना आसमा छूने सा लगता था,
उनका चेहरा देखने दूर जाना पड़ता था,
उन्होंने कभी डाँटा नहीं पर एक आवाज़ में ही रूह कांप जाती थी,
हर फरमाइश तो नहीं पर हर जरूरत कहने से पहले ही पूरी करते थे,
कभी अपेक्षाओं को लादा तो नहीं पर हाँ आंखों में उम्मीदें जरूर नज़र आती थी,
रिजल्ट आने पर इन उम्मीद भरी आंखों में एक चमक आ जाती थी,
सुबह उठ के पूरे साल ठंडे पानी से नहाना,और हमे उठा कर टहलने ले जाना,
रास्ते में अपने बचपन के किस्से सुनाना , और कहना " पढ़ाई में मन लगाना ",
घर में जब कोई मेहमान आए हरसम्भव सुविधा जुटाते थे,
और छुट्टियों में हमें भी खूब घुमाते थे,
जब मम्मी बाहर जाती तो अपने हाथों से खाना खिलाते थे,
हर पल कुछ न कुछ करते रहते थे,

फ़िर एक दिन ऐसा आया, कुछ ऐसा हुआ की वक्त थम सा गया,
मैंने वजह जानना चाहता हूँ, पर उन्हें ढूंढ नहीं पा रहा हूँ,
किसी ने कहा की वो भगवान् के घर गए हैं,
पर मैं इतना तो जानता हूँ की वहां से कोई कभी वापस नहीं आता,
पिछले कुछ समय से वक्त की रफ़्तार कुछ तेज से लगती है,
कितने दिन , महीने , साल गुज़र गए,पर मुझे पता ही नहीं चला,
अब सुबह मंत्रोच्चार नहीं सुनाई देता,
कोई हमारी चादर खींच नहीं उठाता,
अब रिजल्ट आने पर खुशी के साथ दर्द भी महसूस होता है,
मेहमान भी अब कम ही आते है,
पर आज भी उनके बारे में जब सोचता हूँ, वक्त थम सा जाता है,
पलकें भीग जाती हैं ,दिल भी भर आता है,
कितना कुछ है बताने को,पर सब दिल में ही रह जाता है,
रह रहकर वही खालीपन याद आता है,
शायद आज भी उनकी उंगलियाँ मेरे हाथ से बड़ी होती,
शायद आज भी उनके जूते मेरे लिए बड़े होते,
मुझे उनके कन्धों को छूने के लिए उछ्लना नहीं पड़ता,
और उनकी आंखों की चमक को देखने दूर न जाना पड़ता,
काश वक्त का पहिया उल्टा घूम सकता,
काश मैं ये सब उनसे कह सकता...........
काश ये सब काश न रहता......


Missing you Papa
Anjit

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